वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पर एक सीधा संदेश पोस्ट किया और दुनिया को हिला दिया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका आज रात ईरान पर “बहुत ज़ोरदार तरीके” से हमला करेगा। साथ ही यह भी ऐलान किया कि आने वाले समय में अमेरिका खार्ग आइलैंड और ईरान के दूसरे तेल-गैस ठिकानों पर पूरी तरह काबिज़ हो जाएगा।
यह बयान तब आया जब अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन हमले और जवाबी हमले का सिलसिला चल रहा था।

बुधवार की रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में “कई ठिकानों” पर हमले की पुष्टि की। ट्रंप ने खुद Fox News को बताया कि इस दौर में 49 टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं। ये हमले बंदर अब्बास, सिरिक और मिनाब जैसे दक्षिणी ईरानी शहरों के पास हुए।
ईरान ने तुरंत पलटवार किया। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। कुवैत की सेना ने कुछ मिसाइलें रोकीं, जबकि जॉर्डन में रह रहे अमेरिकियों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की चेतावनी दी गई।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि ये हमले ईरान की “बेजा और निरंतर आक्रामकता” के जवाब में किए गए।
खार्ग आइलैंड
फारस की खाड़ी में बसा खार्ग आइलैंड मात्र पाँच मील लंबा एक छोटा-सा टापू है। लेकिन इसकी अहमियत उसके आकार से कहीं बड़ी है। ईरान का करीब 90 फीसद कच्चा तेल इसी द्वीप से होकर निर्यात होता है, और रोज़ाना करीब 15 लाख बैरल तेल यहाँ से निकलता है। यही वजह है कि इसे ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का दिल कहा जाता है।
इस द्वीप पर लंबे घाट बने हैं जहाँ विशालकाय तेल टैंकर आसानी से रुक सकते हैं। ये टैंकर खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होते हुए चीन और दूसरे एशियाई बाज़ारों तक तेल पहुँचाते हैं। ट्रंप ने कहा है कि जिस तरह अमेरिका ने वेनेज़ुएला के तेल बाज़ार पर पकड़ बनाई है, उसी तरह वे ईरान के तेल और गैस बाज़ार पर भी “पूरा नियंत्रण” करेंगे।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि खार्ग आइलैंड को नुकसान पहुँचने का मतलब होगा ईरानी अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ देना।
यह टकराव अचानक नहीं हुआ। फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से करीब 900 हमले सिर्फ 12 घंटों में किए जिनमें ईरानी मिसाइलें, हवाई रक्षा प्रणालियाँ और सैन्य बुनियादी ढांचा तबाह किया गया। उसके बाद से दोनों देशों के बीच रुक-रुककर हमले और जवाबी हमले होते रहे हैं।
ट्रंप का कहना है कि ईरान शांति वार्ता को जानबूझकर लंबा खींच रहा है। अप्रैल 2026 में अमेरिका ने खार्ग आइलैंड पर सैन्य ठिकानों पर हमला किया था, हालाँकि उस बार तेल के बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया गया।
ताज़ा दौर की शुरुआत एक अमेरिकी Apache हेलीकॉप्टर के होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास गिरने की घटना के बाद हुई। इसे लेकर दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने मार्च 2026 में एक कैबिनेट बैठक में कहा था कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमता को “इतनी तेज़ी और प्रभावशाली ढंग से” नष्ट किया है जैसा पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन ईरान ने उसके अगले ही दिन सऊदी अरब स्थित अमेरिकी अड्डे पर हमला करके 700 मिलियन डॉलर का राडार विमान नष्ट कर दिया।
वेनेज़ुएला मॉडल
ट्रंप के बयान में वेनेज़ुएला का ज़िक्र खास मायने रखता है। अमेरिका ने वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र पर जिस तरह दबाव बनाया और नियंत्रण हासिल किया, ट्रंप उसे एक “शानदार सफलता” की तरह पेश करते हैं। अब वे वही फॉर्मूला ईरान पर लागू करने की बात कर रहे हैं।
इस रणनीति के दो हिस्से साफ दिखते हैं। पहला, ईरान की सैन्य ताकत को पहले खत्म करो। दूसरा, उसके बाद उसके ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण लो। ट्रंप ने कहा है कि ईरान की नौसेना, वायु सेना, रडार और हवाई रक्षा प्रणाली “पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।” हालाँकि ईरान इन दावों को खारिज करता है।
ईरान ने साफ कहा है कि वह अमेरिकी दबाव में घुटने नहीं टेकेगा। तेहरान के अनुसार, वाशिंगटन न तो सीरियस बातचीत में रुचि रखता है और न ही किसी संघर्षविराम में। ईरान ने यह भी कहा है कि वह राजनयिक संपर्क पर “पुनर्विचार” कर रहा है।
ISW (Institute for the Study of War) के विश्लेषणकर्ताओं के अनुसार, “ईरानी शासन अमेरिका से रियायतें लेने के लिए सुनियोजित बल-प्रयोग की कोशिश कर रहा है।”
भारत के नज़रिए से भी यह संकट गंभीर है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा गुज़रता है। अगर यह जलमार्ग बाधित हुआ तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ेगा।
11 जून 2026 की रात अमेरिका के और हमलों के बाद दुनिया की नज़रें अब दो सवालों पर टिकी हैं। पहला, क्या ईरान वाकई बातचीत की मेज़ पर वापस आएगा? दूसरा, क्या ट्रंप खार्ग आइलैंड के तेल बुनियादी ढांचे को सीधे निशाना बनाएंगे?
अगर खार्ग आइलैंड पर हमला होता है तो वैश्विक तेल बाज़ार में भूचाल आ सकता है। दुनिया का करीब 20 फीसद तेल होर्मुज़ से होकर गुज़रता है। इस इलाके में किसी भी बड़े टकराव का असर भारत, चीन और यूरोप — सभी पर पड़ेगा। फिलहाल संघर्षविराम की कोई ठोस संभावना नहीं दिखती और मध्य-पूर्व एक बार फिर एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान शांति वार्ता को जानबूझकर लंबा खींच रहा है और लगातार आक्रामक रवैया अपना रहा है। अमेरिकी सेना ने इन हमलों को ईरान की “बेजा और निरंतर आक्रामकता” का जवाब बताया है।
खार्ग आइलैंड ईरान के करीब 90 फीसद कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र है। रोज़ाना लगभग 15 लाख बैरल तेल इसी द्वीप से निकलता है। इस पर कब्ज़ा या नुकसान का मतलब होगा ईरानी अर्थव्यवस्था को लगभग पूरी तरह ठप कर देना।
ट्रंप का दावा है कि ईरान की नौसेना, वायु सेना, रडार और हवाई रक्षा प्रणाली नष्ट हो चुकी है। लेकिन ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे यह साफ है कि उसकी कुछ मारक क्षमता अभी भी बाकी है।
भारत अपने तेल का बड़ा हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से मँगाता है। अगर यह जलमार्ग बंद हुआ तो भारत में तेल के दाम बढ़ सकते हैं और आर्थिक संकट भी गहरा हो सकता है।
इस संघर्ष की शुरुआत फरवरी 2026 के अंत में हुई जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 12 घंटों में करीब 900 हमले किए। तब से दोनों देशों के बीच रुक-रुककर तनाव बढ़ता रहा है।